शनिवार, जुलाई 03, 2010

दोस्तों पर्यावरण पर कुछ विज्ञापन कॉपी

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वे आप भी पढियेगा
...
तुमने हमारा पानी छीना
हमारे जंगल जमीन छीनी
ओ मनुष्य तुम सोचते हो
बोलो हम तुमसे क्या कहें
...

वक्त पानी की तरह बरसता है
वक्त आग की तरह धूप भी बनता है
ठंडी हवाओं में कहता है
आपको क्या पसंद है?
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सोचो एक पेड़ सूखता है
सिर्फ उसकी पत्तियां  नहीं सूखतीं
चिड़िया की आशाएं भी सूखती हैं
...

क्या कहेंगे हम, जब बच्चे पूछेंगे पेड़ का मतलब
चित्र दिखाएंगे, फिर समझाएंगे देखो ये पेड़ है
...

किसी घर में जाना
देखना कितनी लकड़ी है
देखना कितना लोहा है
तब देना धन्यवाद
...

हवाओं से कुछ मत कहना
फूल से कुछ मत कहना
फूल खिलता रहेगा स्वागत में
हवएं आकर बिखरती रहेंगी
...

किसी चिड़िया से पूछना पेड़
किसी गाय से कहना घास
बाघ से पूछना जंगल
वे जानते हैं इनके सही अर्थ
...

लहरों पर कौन लिखता है कचरा
नदी की धार में कौन डालता है गंदगी
कोई बाघ नहीं कोई जंगल नहीं
शायद कोई शहर है यहीं कहीं
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रविद्र स्वप्निल प्रजापति


5 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे ०४.0७.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://charchamanch.blogspot.com/

Vinay Prajapati 'Nazar' ने कहा…

nice poem

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

jabardasht kavita sir ji .. padhkar hi prakruti me kho gaya main .. wah waah

Sonal ने कहा…

ek badiya koshish...

Banned Area News : Karnataka News

mridula pradhan ने कहा…

behad sundar.