शनिवार, जून 19, 2010

जो दिख रहा है वह सब कला है

 

बीमार शेर जिस तरह से शिकार नहीं कर पाता उसी तरह से बीमार कलाकार कलाकृति की रचना नहीं कर पाता। कला के लिए जीवन को बीमारी से बचाना जरूरी है। जीवन की बीमारियां हैं चापलूसी, रिश्वत, बेईमान होना एक कलाकार तभी बनता है जब वह तप्त हो। उसके पास एक आग हो। वरना वह साधारण होकर बुझ जाता है।

प्रख्यात चित्रकार अखिलेश से रवीन्द्र स्वप्निल प्रजापति की बातचीत
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 कला कहां कहां है? कला में देखने का क्या महत्व है?
चित्रकला की बात करें तो इसमें देखना ही होता है। यह चाक्षुष कला है। पेंटिंग में देखने के बाद भाव का स्थान आता है। पेंटिंग में देखना एक व्यक्तिगत क्रिया है। हर कलाकार और देखने वाला इसे अपनी तरह से देखता है। एक कलाकृति देखने को जाग्रत करती है। देखने से यह जाग्रति स्मृति तक जाती है।
अच्छी कलाकृति बड़े समूह की स्मृति और देखने को एक साथ जाग्रत करती है। कला सब जगह है। वह कोई कलाकार के पास नहीं होती। वह सड़क, गली, मित्रों और जो कुछ दिखाई दे रहा है वहां वहां व्याप्त है।

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एक कलाकार के देखने और एक साधारण व्यक्ति के देखने में क्या फर्क है?

एक कलाकार का देखना उतना ही साधारण होता है जितना कि कोई साधारण व्यक्ति देखता है। लेकिन कलाकार के पास एक सजगता होती है। जब कोई कलाकार चीजÞ देखता है तो उसके पास एक सजगता होती है। वह उसके रंग उसके, आकार, उसके भाव से एक तादात्म बनाता है। साधारण व्यक्ति का देखने में सजगता नहीं होती। वह उसके रंग, रूप से स्मृति की तलाश नहीं करता। वह देखता है और आगे चला जाता है। कलाकार का देखना संबंध स्थापित करने की तरह होता है।
कलाकार देखता है तो चीजों के रंगों को देखता है। खाने पीने की चीजों के स्वाद के साथ रंग और आकारों को भी देखता है।
बचपन में बच्चा कई आकृतियां देखता है, लेकिन धीरे-धीरे वह उनसे अपने रिश्ते भूल जाता है। उसका भूलना उसकी कला से विमुखता की तरह की एक प्रक्रिया होती है। जब वही बच्चा बड़े होकर किसी कलाकृति को देखता है तो उसे अपनी स्मृति वापस मिलती है। कला में देखना और फिर उसे वापस पाना एक अनोखी चीज होती है।
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बाजार और कला का क्या रिश्ता है?
बाजार और कला का रिश्ता हमेशा से संग साथ रहा है। कला का बाजार ही उसके महत्व को निधार्रित करने में एक भूमिका निभाता है। कला अपने आप में मूल्यवान होती है लेकिन बाजार उसे एक प्राइस देता है।
यह भी है कि बाजार कभी भी कला पर हावी नहीं रहा है। कलाकार पर हावी नहीं रहा। अगर होता है तो वह नुकसानदेह होता है। किसी कलाकृति का बाजार होना उस कलाकृति की ताकत है।

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आज की कला प्रवृत्तियों के बारे में क्या कहना चाहेंगे?

आज की कला प्रवृत्ति संयोजन की अधिक है। संयोजन में काम अधिक हो रहा है। कलाकार कई तरह से इसे अभिव्यक्ति देना चाहते हैं। इसलिए युवा कलाकार अपनी कला में एक साथ कई चीजों का प्रयोग करते हुए अपनी कला को प्रदर्शित करते हैँ। इसमें देश के ही नहीं विदेश के लोग भी हैं।
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कला के बेसिक क्या हैं? इनके बिना कोई कला की परंपरा संभव है?

कला के आधार कभी नहीं बदलते। जैसे कि लेखक के पास कवि के पास शब्द तो उतने ही होते हैं लेकिन हजारों लेखक उनसे कुछ अलग अलग ही लिखते हैं। वाक्य भी वैसे ही बनते हैं। प्रक्रिया एक ही होती है। लेकिन उनका प्रयोग बदल जाता है। यही चीज पेंटिंग में और दूसरी कलाओं में है।

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जीवन का कला से क्या रिश्ता है?
संबंध गहरा है। कला का जीवन से संबंध बहुत गहरा है। अगर आपके पास जीवन नहीं होगा तो आप किसी तरह की रचना नहीं कर पाएंगे। कहने का मतलब बीमार शेर जिस तरह से शिकार नहीं कर पाता उसी तरह से बीमार कलाकार कलाकृति की रचना नहीं कर पाता। कला के लिए जीवन को बीमारी से बचाना जरूरी है। जीवन की बीमारियां हैं चापलूसी, रिश्वत, बेईमान होना एक कलाकार तभी बनता है जब वह तप्त हो। उसके पास एक आग हो। वरना वह साधारण होकर बुझ जाता है। कलाकार चित्रकारी करे या कविता लिखे या संगीत रचना करे, अगर उसके जीवन में सच नहीं होगा तो वह कलाकृति की रचना नहीं कर पाएगा। हमने समाज में कई प्रतिभाशाली लोगों को इन बीमारियों से गृसित होगर मरते देखा है।
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कला में प्रभावित होना क्या है? क्या कोई कलाकार प्रभावित हुए बिना सृजन कर सकता है?

कतई नहीं। जो कलाकार प्रभावित होने से इंकार करता है वह संवादहीन होता है। प्रभावित नहीं होने की बात कह कर आप एक खास तरह का झूठ ही बोलते हैं।
जब आप प्रभावित होते हैं तो आप अपनी पूरी परंपरा से जुड़ते हैं। इस प्रकार बगैर प्रभावित हुए आप अच्छे चित्रकार नहीं हो सकते। 
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मध्यप्रदेश में कला का परिवेश कैसा है? आप क्या संभावनाएं देखते हैं?

युवा लगातार अच्छा काम कर रहे हैं। उन्हें सीधी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। इंटरनेट की सुविधा से यह काम आसान हो गया है। भोपाल के ही युवा कलाकार गोविन्द बहुत ही संभावना के साथ हमारे सामने आए हैं। अच्छे काम के साथ लगातार करते रहना भी आवश्यक है।

2 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 20.06.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://charchamanch.blogspot.com/

RAVINDRA SWAPNIL PRAJAPATI ने कहा…

thanks manoj ji