बुधवार, मई 06, 2009

पहले अंतर्राष्‍ट्रीय डिजिटल पुस्‍तकालय पर। दुनिया भर के इंटरनेट प्रयोक्‍ताओं के लिए इस पुस्‍तकालय का औपचारिक उदघाटन गत माह फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुआ। विभिन्‍न देशों की सांस्‍कृतिक विरासत को इंटरनेट पर उपलब्‍ध कराने के अंतर्राष्‍ट्रीय साझे प्रयास का यह अच्‍छा उदाहरण है।
पाठक www.wdl.org पर जाकर दुनिया की तमाम दुर्लभ पुस्तकें पढ़ सकते हैं। यह 19 देशों के पुस्तकालयों के सहयोग से साकार हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस के वाशिंगटन स्थित पुस्तकालय और मिश्र के एलेक्जेण्ड्रिया पुस्तकालय ने मिलकर इसे विकसित किया है, और इसे यूनेस्को के पेरिस कार्यालय से लांच किया गया है। हालांकि यह ऐसा पहला अंतर्राष्ट्रीय प्रयास नहीं है। इंटरनेट सर्च इंजिन गूगल ने 2004 में ऐसा ही प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसके अलावा यूरोपीय संघ ने नवंबर, 2008 में अपना डिजिटल पुस्तकालय शुरू किया था।

यूनेस्को के इस नये पुस्तकालय के जरिये उपयोगकर्ताओं को विश्व की सात भाषाओं में दुर्लभ पुस्तकें, मानचित्र, पाण्डुलिपियां और वीडियो मिल सकते है, और दूसरी भाषाओं में भी जानकारी उपलब्ध है। यूनेस्को के संचार और सूचना महानिदेशक अब्दुल वहीद खान कहते हैं कि इससे विश्व के देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने में मदद मिलेग.

कोई टिप्पणी नहीं: