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गुरुवार, जून 20, 2013

अपसंस्कृति का जहर

उपभोगवादी आधुनिक मानसिकता और निजी स्वतंत्रता मिल कर सामाज में अपसंस्कृति का जहर फैला रही हैं। यह कुत्सित मानसिकता ही है कि सात वचन लेने वाला पति, पत्नी के फोटो सार्वजनिक करता है।

आ ज देश उदारवाद और उपभोगवाद का आनंद ले रहा है। निजी आजादी जो हमको अपने काम करने की स्वतंत्रता और अवकाश देती है, लेकिन उसमें से संयम गायब हो गया है। इस आजादी को लोगों ने मानसिक कुत्साएं पूरा करने और पैसे कमाने की लालसा से भर लिया है। निजी आजादी के नाम पर कुंठित और प्रदूषित मानसिकता की अभिव्यिक्ति होने लगी है। हम जीवन को एक यज्ञ की तरह नहीं, उपभोग के वीभत्स उपकरण की तरह स्वीकार कर रहे हैं। जीवन के अनुशासनों को हमने दूर रख दिया है।
हाल ही में घटना घटी है जिसमें पति अपनी ही पत्नी के न्यूड फोटो अपने मित्रों को ईमेल करता था। इससे पहले सेना के कुछ अधिकारियों के बारे में खबर आई थी कि वे अपनी पत्नियों को अन्य के साथ संसर्ग करने के लिए दबाव डाल रहे थे। आखिर हमारे जीवन में इस तरह के विकारों को जगह  कैसे मिली? क्या यह पैसे की अधिकता, उपभोगवादी मानसिकता और संस्कार रहित जीवन का प्रतीक है? आधुनिक जीवन शैली और काम के बोझ के कारण जीवन से रचनात्मकता खत्म हो रही है। एक ओर हम आधुनिकता की होड़ में अपनी संस्कृति से अलग होते जा रहे हैं। अपने संस्कार भूलते जा रहे हैं। दूसरी ओर, पश्चिमी संस्कृति को भी नहीं अपना पा रहे हैं, क्योंकि अपनी संस्कृति का मोह हम नहीं छोड़  पा रहे हैं। इस तरह जो सांस्कृतिक घालमेल हमारे जीवन में हो रहा है, उससे जो अपसंस्कृति तैयार हो रही है, उससे हमारा सामाजिक अनुशासन टूट रहा है। हम पश्चिम को अराजक मानते रहे हैं जबकि वहां जीवन पूरी तरह सामाजिक अनुशासनों में बंधा है। वहां कानून का शासन है, वहां सड़क पर पैदल चलते व्यक्ति को कार का हार्न बजा कर चौंकाया नहीं जाता। कार रोक ली जाती है। वहां रात को अकेली लड़की देख कर कोई छेड़ता नहीं है। लेकिन हम इस सबको लेकर कुंठित हो जाते हैं। अधकचरी जानकारी और अपनी जड़ों से कटने का नतीजा है कि हमारी नई पीढ़ी भी भटकाव का शिकार है। इसमें बच्चे भी भटक रहे हैं। उनमें नशाखोरी बढ़ रही है। उनको माता पिता का साया मिलना मुश्किल हो रहा है। विज्ञापन युग की बाजारवादी संस्कृति के बारे में ज्यां बोद्रिला कहते हैं कि इस विकराल उपभोग से जन्मी संस्कृति ही हमारे समय की संस्कृति है। इस संस्कृति ने सभी परंपरागत मूल्यों-अवधारणाओं को खत्म कर दिया है।  हम ‘आर्थिक मनुष्य’ बनने की विवशता झेल रहे हैं, जिसमें कलाओं के लिए जगह ही नहीं बची है, पुस्तकों को क्यों पढ़ें? उनका संसार खिन्नता की मन:स्थिति रचता है। वाल्टर बेंजामिन ने टेक्नोलॉजी के उदय में मनुष्य की मुक्ति का जो सपना देखा था वह टूट चुका है। टेक्नोलॉजी ने भयानक दासता को जन्म देकर हमें कब्जे में कर लिया है। आज उपभोग की संस्कृति ने नैतिक मूल्यों को अपदस्थ कर दिया है।  इस सदी के भारत में बेरोजगारी नहीं बल्कि लोगों में बढ़ रही अपसंस्कृति की समस्या प्रमुख होगी। यह समस्या समाज के लिए चुनौती बन कर उभर चुकी है।

सोमवार, अगस्त 27, 2012

खेल संस्कृति का हिस्सा

  खेल संस्कृति का हिस्सा हैं। कृष्ण का यमुना किनारे गेंदगड़ा खेलना और ग्रीस में ओलंपिक के आयोजन दुनिया में प्राचीन खेल परंपराओं के सबसे अच्छे उदारहण हैं। बदलते वक्त के साथ अन्य खेल भी इसमें जुड़े और लोकप्रिय हुए हैं। क्रिकेट ऐसा ही एक खेल बन चुका है। देश का बच्चा-बच्चा क्रिकेट को खेलता है। जब भारत क्रिकेट का कोई मैच जीता है तो हर शहर और गांव के लिए खबर बन जाती है। यही कारण है कि अब देश की राष्ट्रीय टीम ही नहीं, किशोर युवाओं की टीम जीतती है तो देश में जीत का एक भाव जन्म लेता है। आईसीसी अंडर-19 टीम के विश्वकप फाइनल में देश के जांबाज किशोर क्रिकेटरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए  चौथी बार अपनी जगह बनाई है। ओपनर प्रशांत चोपड़ा के अर्धशतक और बाबा अपराजित की शानदार बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजों के जोरदार प्रयास की बदौलत भारत ने अंडर-19 विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड  को नौ रनों से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। फाइनल का खिताब हासिल करने के लिए भारत को मेजबान आॅस्ट्रेलिया का सामना करना होगा और उसे हराना भी होगा। टोनी आयरलैंड स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत ने हर क्षेत्र में कमाल का खेल दिखाया। भारतीयों का क्रिकेट दुनिया के लोग भी पसंद करते हैं। इसकी लोकप्रियता के कई कारण हो सकते हैं लेकिन मुख्य कारण तो यही है कि हमारे बच्चे इसे गली कूचों ही नहीं दो कारों के बीच जगह मिलने पर भी   खेल लेते हैं।
सेमीफाइलन की जीत भी रोमांचक रही। पहले धीमी बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 50 ओवर में नौ विकेट पर 209 रन बनाए। भारत की तरफ से चोपड़ा के अलावा अपराजित ने 44 और कप्तान उन्मुक्त चांद ने 31 रनों का योगदान दिया। जवाब में न्यूजीलैंड कैम फ्लेचर (53 रन) के अर्धशतक के बावजूद 50 ओवर में नौ विकेट पर 200 रन ही बना सका। भारत की ओर से संदीप शर्मा, रविकांत सिंह और हरमीत सिंह को दो-दो विकेट मिले। आॅस्ट्रेलिया ने बुधवार को दक्षिण अफ्रीका को चार विकेट से हराकर फाइनल में जगह पक्की की है। खेल ऐसा क्षेत्र है जहां हम अपनी टीम भावना और हिम्मत का शानदार प्रदर्शन करते हैं। भारत ने क्वार्टर फाइनल मे रोमांचक तरीके से चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के एक विकेट से हराया था। भारतीय टीम तीसरी बार इस खिताब पर कब्जा करने उतरेगी। भारत ने 1999-2000 मे श्रीलंका को हराकर पहली बार यह खिताब जीता था। इसके बाद 2007-08 में खिताबी जीत हासिल की थी। उससे पहले, भारत को 2005-06 में पाकिस्तान के हाथों फाइनल में हार मिली थी। इस जीत में भारतीय गेंदबाजों ने गजब की गेंदबाजी का प्रदर्शन किया था। न्यूजीलेंड के बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए तरसा दिया।  रविवार को फाइनल मुकाबला है। टीम को अपनी खेल भावना और टीम स्पिरिट का शानदार प्रदर्शन करना होगा। खेल का अर्थ है जीत के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करना। रविवार को यही जीत का राज होगा।